* * * पटना के पैरा-मेडिकल संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च जयपुर कें निम्स यूनिवर्सिटी द्वारा अधिकृत कएल गेल। *

Tuesday, 1 December, 2009

मैथिली विभाग बंद हएत ?

शिक्षक-छात्र अनुपात रैशनलाइजेशन केर नाम पर कतेको महीना सं जारी खींचतानक बाद,अंततः बिहार सरकार नव फरमान जारी कए देलक अछि। एहि में कहल गेल छैक जे जहि विभाग में दस टा सं कम छात्र छैक,तकरा बंद कएल जाएत अथवा बेसी छात्र बला महाविद्यालय संग एकीकृत कएल जाएत। जाहिर छैक,मैथिलीयो पर गाज गिरब तय भ गेल छैक। जहि चारि विषय के ल कए सुगबुगाहट चलैत छल,तहि में मैथिली शामिल छलीह मुदा निश्चित रूप सं,ऊर्दू,संस्कृत आ फारसी सं बेसी विद्यार्थी त एहि में अछिए। निस्संदेह,कतेको कॉलेज में विद्यार्थी लोकनिक अभाव में शिक्षकलोकनिक तोंद बढ़ि गेल रहनि। सरकारी राजस्व पर एहन लोकनिक बोझ देब उचित नहिं जनिका लग पछिला कतेको बरख सं कोनो छात्र नहिं छनि। मुदा,आन भाषाक तुलना में,मैथिलीक स्थिति कनेक भिन्न राखल जाएब उचित होईतैक। किएक तं,आठम अनुसूची में मैथिली के शामिल भेला अखन बेसी दिन नहिं भेल छैक। रोजगारक अवसर देखि,छात्र लोकनिक रुझान मैथिली दिसि बढबाक कतेकेो प्रमाण भेटैत छैक। तें,मैथिली कें एहि मादें किछु आओर समय भेटबाक चाहैत छल। देखा चाही की होईत छैक। ताधरि,हिंदुस्तान में प्रकाशित ई खबरि पढ़ूः

01 दिसम्बर,2009 केर हिंदुस्तान,पटना में यथाप्रकाशित

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