* * * पटना के पैरा-मेडिकल संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च जयपुर कें निम्स यूनिवर्सिटी द्वारा अधिकृत कएल गेल। *

Sunday 13 December 2009

शिक्षक बहाली लेल सुप्रीम कोर्टक आदेश पर दैनिक जागरण

प्रदेश में शिक्षक भर्ती की एक कथा कार्यपालिका और न्यायपालिका के घुमावदार गलियारों से होती हुई छह साल पुरानी हो चली है। यह कहानी दो सरकारों के कार्यकाल से गुजरती है। वर्ष 2003 में राबड़ी देवी के नेतृत्व वाली राजद सरकार ने प्राथमिक शिक्षकों के 34540 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। आवेदन प्रशिक्षित और अप्रशिक्षित दोनों तरह के उम्मीदवारों की भर्ती के लिए थे। इस मुद्दे पर पटना हाईकोर्ट ने प्रशिक्षित शिक्षकों की भी भर्ती करने को अनुचित ठहराते हुए आवेदन मांगने संबंधी विज्ञापन की अधिसूचना रद कर दी और राज्य सरकार को प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती का निर्देश दिया। मामला सुप्रीमकोर्ट पहुंचा और सुप्रीमकोर्ट ने प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती पर अपनी मुहर लगाई। 2005 में विधान सभा के चुनाव के बाद राज्य में सरकार बदल गई। सत्ता में आने वाली नीतीश सरकार ने शिक्षक भर्ती की अपनी अलग नीति और प्रक्रिया तय की, इसलिए उसने सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बाद भी पिछली सरकार के समय की जरूरतों और पैमाने के मुताबिक शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की। इस पर पीडि़त पक्ष ने सुप्रीमकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की और शिक्षक भर्र्ती आदेश पर अमल कराने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान वर्तमान राज्य सरकार भर्ती में असमर्थता जताते हुए लगातार यही दलील देती रही कि उसके पास प्रशिक्षित शिक्षकों के इतने पद रिक्त नहीं हैं, लेकिन सुप्रीमकोर्ट ने उसकी ये दलील नहीं मानी। अदालत ने लोकतांत्रिक जनादेश के जरिये सरकार के राजनीतिक नेतृत्व में हुए बदलाव की परिस्थिति को संज्ञान में नहीं लिया। खंडपीठ ने सरकार-सरकार में फर्क न करते हुए कहा कि चूंकि राज्य सरकार ने स्वयं अपने विज्ञापन में 34540 रिक्तियों की बात स्वीकारी है, इसलिए उसे इतने पदों पर प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती करनी होगी। बुधवार के इस फैसले से हजारों उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली। न्यायमूर्ति अल्तमश कबीर व न्यायमूर्ति एचएल दत्तू की खंडपीठ ने भर्ती विवाद में फैसला सुनाते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 18 और 23 जनवरी 2006 को सुप्रीम कोर्ट में प्रशिक्षित शिक्षकों की भर्ती की जो अंडरटेकिंग दी थी, वह बाध्यकारी है। भर्तियां वरिष्ठता के आधार पर होंगी। अब जिनकी नियुक्ति संभावित है, उनके उत्साह (और कार्यक्षमता) पर लंबी कानूनी लड़ाई का असर होने की बात कही जा रही है, इसलिए सरकार को न्यायालय के आदेश का पालन करने के साल भर बाद इन शिक्षकों की दक्षता परीक्षा भी आयोजित करनी चाहिए। कार्यपालिका के इस निर्णय से शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित हो सकेगी।
10 दिसम्बर,2009 केर दैनिक जागरण,पटना संस्करण केर संपादकीय

No comments:

Post a Comment