* * * पटना के पैरा-मेडिकल संस्थान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एजुकेशन एंड रिसर्च जयपुर कें निम्स यूनिवर्सिटी द्वारा अधिकृत कएल गेल। *

Tuesday, 21 July 2009

Wednesday, 1 July 2009

Vacancy Position in Maithili-बिहार में मैथिली लेक्चरर के रिक्त पद

सूचना अधिकार अधिनियमक अंतर्गत जुटाओल जानकारी अनुसार,बिहारक विभिन्न विश्वविद्यालय सभ में मैथिली लेक्चरर सभहक संस्वीकृत आ रिक्त पदक अद्यतन स्थिति निम्नानुसार अछिः
विश्वविद्यालय संस्वीकृत पद रिक्त पद
ललित नारायण मिथिला 42
भूपेंद्र नारायण मंडल 24
पटना विश्वविद्यालय 7 2
बिहार विश्वविद्यालय
वीर कुंअर सिंह
मगध 4 2

बिहारो में प्रोफेसर लोकनि 65 वर्ष में रिटायर हेताह

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 30 जून कए विधान परिषद में कहलनि जे सरकार विश्र्वविद्यालय शिक्षक सभहक सेवानिवृत्ति उम्र 62 सं बढ़ाकए 65 वर्ष करबाक लेल सरकार तैयार छैक। चमचालोकनि के फायदा पहुंचएबाक लेल फैसला के बैकडेट सं लागू करबाक परंपरा रहल छैक मुदा एहि मुद्दा पर विधि विभाग सं परामर्शक बादे कोनो निर्णय लेल जाएत। मुख्यमंत्री शून्यकालक बाद विश्र्वविद्यालय शिक्षकलोकनिक लेल यूजीसी पैकेज लागू करए सम्बन्धी सदस्यलोकनिक अनुरोध पर कहलनि जे हुनका एहि सम्बन्ध में विशेष जानकारी नहीं छन्हि। हुनक कहब रहनि जे वर्तमान सरकार एहन कानून बनओने अछि जाहि सं यूजीसी वेतनमान स्वत: लागू भए जाएत।

Monday, 18 May 2009

Lectureship in Bihar- मैथिली पर गाज गिरबाक संभावना

संविधानक आठम अनुसूची में मैथिलीक प्रवेशक उपरांत एहि में नौकरीक संभावना बढ़ल देखि कए,कतेको पीएचडी केनिहार प्रसन्न भेल छलाह जे बिहारक विश्वविद्यालय में 2009 में होमय बला भर्ती में हुनकर लेक्चरशिप केओ नहिं रोकि सकैत छन्हि। मुदा स्थिति एतेक आसान नहिं। बिहार सरकार सभ विश्वविद्यालय के पत्र लिखने अछि जे किछु विषय में ओहि अनुपात में शिक्षकक बहाली लेल विज्ञापन देल जाए जाहि अनुपात में ओहि विश्वविद्यालय में संबंधित विषयक छात्र होथि। एहि क्रम में चारि विषयक खासतौर सं उल्लेख कएल गेल अछि जाहि में मैथिलीक अतिरिक्त संस्कृत,फारसी आ भूगोल शामिल अछि। एक एहन समय में जखन आन-आन राज्य भाषा विश्वविद्यालय खोलि रहल अछि,बिहार में राजभवनक एहि पत्रकें भाषाक प्रतिएं घोर विनाशकारी कदम मानल जएबाक चाही। सरकारी संरक्षणक बिनु भाषाक विनाश निश्चित छैक। समय आबि गेल छैक जे आब,अपन वेतन-भत्ता आ सेवानिवृत्तिक आयु बढ़एबाक लेल लगातार संघर्षरत रहनिहार बिहारक विश्वविद्यालय शिक्षक संघ अपन आंदोलन में एहि मुद्दाकें प्रमुखता सं उठाबए। ओना,मैथिली सं बेसी खस्ताहाल आन उल्लिखित भाषा सभ अछि। जखन छोट-छोट जगह में पढाईलेल शिक्षकक नियुक्तिए नहिं होएत तं दूर-दराजक छात्रक लेल आओर कोन विकल्प रहि जेतैक-सिवाए विश्वविद्यालय मुख्यालय में आबिकए पढ़बाक?की मिथिलांचलक लेल संघर्षरत रहनिहार लोकनिक निन्न आबो खुजतनि?
टाइम्स आफ इंडिया में 15 मई,2009 कए प्रकाशित रिपोर्टक लेल एहि लिंक पर क्लिक करु-

Saturday, 16 May 2009

एतेक आसान नहिं बिहार में लेक्चरशिप


हिंदुस्तान,पटना,16मई,2009

Wednesday, 13 May 2009

बिहार में लेक्चरर बनबाक अछि? अंक जोड़ू


हिंदुस्तान,12मई,2009

Thursday, 26 March 2009

बिहार में शिक्षक-छात्र अनुपात

नौ विवि के 250 अंगीभूत कालेजों में शिक्षकों एवं छात्रों के अनुपात की जांच की योजना पिछले दो वर्षों से लटकी हुई। इस वजह से बगैर अध्यापन के पगार लेने वाले गुरुजी की मौज है। जांच नहीं होने से शिक्षकों को दूसरे कालेजों में तबादला नहीं किया जा रहा है। बता दें कि तत्कालीन राज्यपाल आर. एस. गवई ने विवि एवं कालेजों में शैक्षिक सुधार करने की मुहिम छेड़ दी थी। उन्होंने विवि से संबंधित कार्याें की देखरेख को एक ओएसडी नियुक्त किया था। ओएसडी डा. कृष्ण कुमार ने कालेजों का ताबड़तोड़ निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंेने पटना समेत अन्य विवि के कालेजों एवं विभागों में व्याप्त अराजकता पाया था। कुछ कालेजों के कई- कई विभागों में नामांकन की बोहनी तक नहीं हुई जबकि कई विभागों में छात्रों की संख्या कम थी। कई विषयों में स्वीकृत पद से शिक्षकों की संख्या तो कम थी मगर छात्रों के हिसाब से कई गुना अधिक थी। इसके बाद राजभवन ने विवि से अपने सभी कालेजों में विषयवार शिक्षकों की संख्या तथा अध्ययनरत छात्रों की संख्या तलब किया। उन्होंने विवि के कुलपति या अन्य दूसरे पदाधिकारी की कमेटी गठित करने के निर्देश दिये। जिसे कालेजों तथा विभागों में छात्रों एवं शिक्षकों के अनुपात की जांच करने को कहा गया। बताया जाता है कि विवि से जानकारी मिलने के बाद राजभवन कालेजों में छात्र व शिक्षक अनुपात की समीक्षा का फैसला किया है। राज्यपाल का यह कदम शिक्षकों को रास नहीं आया और दबी जुबान से विरोध करने लगे। मगर राज्यपाल के सख्त तेवर को देख कर कोई भी खुल कर सामने नहीं आया। इसी बीच डा. आरएस गवई राज्यपाल पद से हटा दिये गये। उनके जाते ही शिक्षकों और छात्रों के अनुपात की जांच का मामला लटक गया।
,दैनिक जागरण,26मार्च,2009